झगड़ा नहीं है, विप्र, इस जनेऊ का,यूं मैं बेतरतीब कटा हूँ।
“It's no quarrel, O Brahmin, concerning this sacred thread,But thus, I've been cut down, indiscriminately, instead.”
— अमृत घायल
अर्थ
हे ब्राह्मण, यह झगड़ा जनेऊ का नहीं है, बल्कि मैं यूँ ही बेतरतीबी से काटा गया हूँ।
विस्तार
यह शेर एक बहुत ही नाज़ुक स्थिति को बयान करता है। शायर यहां एक तपस्वी से कह रहे हैं कि इस जनेऊ के टूटने या कटने का कारण कोई झगड़ा नहीं था। बल्कि, यह तो यूँ ही, बेतरतीब ढंग से, अचानक से कट गया है। यह एक तरह से मन की शांति और निर्दोष होने का एहसास दिलाता है।
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