'घायल', दिवस, अपनी मलीन ओढ़नी ओढ़कर, सी रहा है श्वेत कफ़न! रात तो देखो!
“'Ghayal,' the day, having donned its own faded veil, Is stitching a white shroud! Just look at the night!”
— अमृत घायल
अर्थ
कवि 'घायल' दिन को देखता है, जिसने अपनी फीकी ओढ़नी पहनी है, और वह सफेद कफन सी रहा है। रात तो देखो!
विस्तार
यह शेर बहुत गहरा है, जिसमें एक तरह की उदासी और तैयारी का एहसास है। शायर अम्रुत घायल बताते हैं कि दिन के उजाले में वह बस अपनी गंदी ओढ़नी ओढ़े हुए हैं, लेकिन उनका ध्यान एक सफेद कफ़न सिलने पर है। यह दिखाता है कि ज़िंदगी में कोई व्यक्ति सिर्फ़ जीने की तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि अपने अंत की तैयारी कर रहा है। और जब वह कहते हैं 'रात तो देखो!', तो यह एक चेतावनी है कि असली सच्चाई तो अँधेरे में सामने आती है।
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