प्रभात ने अभी स्पर्श नहीं किया है, फिर भीकैसा बदन चुरा रहा है! रात तो देखो!
“Though morning's touch has yet not graced its form,What beauty it steals! Just behold the night!”
— अमृत घायल
अर्थ
प्रभात ने अभी स्पर्श भी नहीं किया है, फिर भी देखो यह रात कैसा शरीर चुरा रही है। ज़रा रात को तो देखो!
विस्तार
यह शेर उस बेमिसाल आकर्षण की बात करता है जो समय की सीमाओं से परे होता है। अम्रुत घायल जी कहते हैं कि सुबह की रौशनी (यानी सच्चाई) ने अभी छुआ भी नहीं है, लेकिन यह खूबसूरती इतनी चुरा रही है कि लगता है जैसे रात का जादू ही है। यह एक गहरे जुनून का एहसास है।
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