न हिंदू निकले, न मुसलमान निकले,कब्रें खोलीं तो बस इंसान निकले।
“No Hindu emerged, no Muslim was found,When graves were opened, only humans were around.”
— अमृत घायल
अर्थ
जब कब्रें खोली गईं तो न कोई हिन्दू निकला, न कोई मुसलमान निकला, बल्कि केवल इंसान ही निकले। यह दर्शाता है कि मृत्यु के बाद सभी भेद मिट जाते हैं और केवल मानवता ही शेष रहती है।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि एक गहरा दर्शन है। शायर, अमृत घायल, हमें याद दिलाते हैं कि पहचानें कितनी भी मज़बूत क्यों न हों, इंसानियत सबसे ऊपर है। जब हम किसी की आस्था या धर्म को हटाकर देखते हैं, तो जो चीज़ बचती है, वह केवल एक इंसान होती है। यह एक बहुत ही ज़िंदादिल और सच्चा एहसास है।
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