दो बातें करके परिंदे बन जाते हैं, उड़ते हैं आड़े-तिरछे, कुछ यूं ही आपस में गुँथकर, बिखर जाने में क्या लज्जत है!

“Having exchanged a few words, they become like pigeons, flying hither and thither, What a delight it is, in thus intertwining and then scattering!”

— अमृत घायल
अर्थ

दो बातें करके वे कबूतरों की तरह इधर-उधर उड़ जाते हैं। एक-दूसरे से इस तरह गुंथकर और फिर बिखर जाने में क्या मज़ा है!

विस्तार

यह शेर कबूतरों के माध्यम से बिछड़ने की कला को बयां करता है। शायर कहते हैं कि एक पल की बात-चीत के बाद, ये पंछी ऐसे उड़ते हैं जैसे उन्हें पता ही न हो कि कहाँ जाना है। यह सवाल पूछना कि बिखर जाने में क्या लज्जत है, असल में हमारे रिश्तों की उलझन है। कभी-कभी, साथ रहने से ज़्यादा, आज़ादी और बिछड़ जाने की अपनी एक ख़ास मिठास होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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