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भले-बुरे का भान नहीं पर इतना जानता हूँघायल’,जो आए कंठ में उमंग से, उसे गाने में लज़्ज़त है

I lack discernment of good or bad, but this much I know, 'Ghayal',Whatever comes to my throat with ardour, in singing it lies delight.

अमृत घायल
अर्थ

कवि 'घायल' कहते हैं कि उन्हें भले-बुरे का कोई भान नहीं है। परंतु वे इतना जानते हैं कि जो कुछ भी उमंग से उनके कंठ में आता है, उसे गाने में ही वास्तविक आनंद है।

विस्तार

ये शेर ज़िन्दगी के उस एहसास को बयान करता है, जब हम सही और गलत की सीमाओं से परे होते हैं। शायर कह रहे हैं कि हमें पता नहीं कि क्या अच्छा है और क्या बुरा... पर हमें यह बात ज़रूर पता है कि जब दिल की उमंगें, बिना किसी रोक-टोक के, हमारे कंठ तक पहुँचती हैं, तो उसे गाने में एक अलग ही मज़ा आता है।

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