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ग़ज़ल

ખંજર સુધી ગયા

ખંજર સુધી ગયા
अमृत घायल· Ghazal· 7 shers

यह ग़ज़ल किसी गहन भावनात्मक संघर्ष और प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाती है, जहाँ वक्ता ने प्रेम के नाम पर हर सीमा को लांघ दिया है। इसमें वियोग, समर्पण और तीव्र विरह की भावनाएं व्यक्त की गई हैं।

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1
ગુસ્સે થયા જો લોક તો પથ્થર સુધી ગયા. પણ દોસ્તોના હાથ તો ખંજર સુધી ગયા.
गुस्से हुए जो लोग तो पत्थर तक गए। पर दोस्तों के हाथ तो खंजर तक गए।
जब लोग क्रोधित हुए तो वे पत्थरों तक गए, लेकिन दोस्तों के हाथ तो खंजरों तक जा पहुँचे। यह दर्शाता है कि अपनों द्वारा की गई बेवफ़ाई अजनबियों के गुस्से से कहीं ज़्यादा दर्दनाक होती है।
4
એવા હતા મનસ્વી કે આ પ્રેમમાં તો શું, વેવારમાં ય ના અમે વળતર સુધી ગયા.
ऐसे थे हम मनस्वी कि इस प्यार में तो क्या कहें, लेन-देन में भी हम प्रतिफल तक न गए।
हम इतने स्वाभिमानी थे कि प्रेम में तो क्या कहें, सामान्य व्यवहार में भी हम कभी प्रतिफल की अपेक्षा तक नहीं गए।
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