Sukhan AI
लज्जा के बंधन तोड़, ज़ुल्फ़ें दो बिखेर,जीवन बने भले अस्त-व्यस्त, मुझे यह भाता है।

Break the bonds of shame, scatter your tresses free,Though life becomes chaotic, it is pleasing to me.

अमृत घायल
अर्थ

शर्म के बंधनों को तोड़कर अपनी ज़ुल्फ़ें बिखेर दो। भले ही जीवन अस्त-व्यस्त हो जाए, मुझे यही पसंद है।

विस्तार

यह शेर एक बहुत ही गहरे, मदहोश समर्पण की बात करता है। शायर, अम्रुत घायल, अपनी महबूबा से कह रहे हैं कि अपनी लज्जा के बंधन तोड़ दो और ज़ुल्फ़ें बिखेर दो। इसका सार यह है कि चाहे यह इश्क़ जीवन को कितना भी अस्त-व्यस्त कर दे, उन्हें उस बिखराव में ही अपना सुकून और खुशी मिल जाती है। यह बस बेपरवाह होकर जीने का नशा है!

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.