देखे हैं कई 'घायल' इस चोटी से फेंके जाते हुए, इक पल को ही बस यूँ ही आकर मैं मीनार पर खड़ा हूँ।

“I've seen many, 'Ghayal', hurled from this very peak, For but a moment, I've simply come to stand upon this minaret.”

— अमृत घायल
अर्थ

कवि 'घायल' कहता है कि उसने बहुतों को इस ऊँची चोटी से नीचे फेंके जाते देखा है। वह स्वयं तो बस एक पल के लिए ही यूँ ही आकर मीनार पर खड़ा है।

विस्तार

यह शेर ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव और इंसान की हिम्मत को दिखाता है। शायर कह रहे हैं कि उन्होंने कई लोगों को, कई 'घायल' दिलों को, बहुत ऊँचाई से गिरते देखा है। लेकिन इन सब झटकों के बाद भी, आज वो खुद मीनार पर ऐसे खड़े हैं, जैसे कुछ हुआ ही न हो। यह एक पल की स्थिरता है, जो बताती है कि ज़िंदगी में कभी-कभी अचानक एक ठहराव आ जाता है।

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