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समझ नहीं आता कि कहाँ से मुझे ये ऐसा पागलपन लगा है!जहाँ शाम को मिला था तिरस्कार, वहाँ आकर, सुबह मैं खड़ा हूँ

I understand not whence this madness has come to me!Where I received a sharp rebuke last eve, I've come and stand, this morn, to see.

अमृत घायल
अर्थ

वक्ता इस बात पर हैरान है कि उसे यह पागलपन या जुनून कहाँ से लगा है। पिछली शाम जिस जगह उसे तिरस्कार या डाँट मिली थी, अगली सुबह वह फिर उसी जगह पर आकर खड़ा है।

विस्तार

यह शेर दिल की उस उलझन को बयां करता है, जब इश्क़ में समझ से बाहर का पागलपन छा जाए। शायर, अमृत्त घायल, कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि यह जुनून कहाँ से आया है। वह उस जगह पर खड़े हैं, जहाँ शाम को उन्हें तिरस्कार मिला था, और अब सुबह भी वही जगह है। यह दिल के उस ज़िद और दर्द को दिखाता है जो वक़्त गुज़रने के बावजूद नहीं भूला जा सकता।

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