“Let someone tell the cupbearer that we are dying of thirst; if wine is denied, let him pour a cup of poison—so be it!”
कोई साक़ी से कह दे कि हम प्यास से मरे जा रहे हैं; अगर शराब नहीं दे सकता, तो ज़हर का ही प्याला दे दे, कोई परवाह नहीं।
इस शेर में शायर तड़प और बेबसी की उस इंतिहा को बयां कर रहे हैं, जहाँ इंतज़ार की प्यास अब बर्दाश्त से बाहर हो चुकी है। यहाँ साक़ी महबूब का प्रतीक है और मय (शराब) उसके प्यार और तवज्जो की, जिसके बिना जीना मुहाल है। यह अधूरापन इतना भारी है कि शायर ज़हर पीकर फ़ना हो जाने को भी तैयार है, क्योंकि महरूमी में तिल-तिल मरने से बेहतर उसे मौत का जाम लगता है।
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