क़ैस हो कोहकन हो या 'हाली' आशिक़ी कुछ किसी की ज़ात नहीं

“Be it Qais, the mountain-hewer Kohkan, or Hali— / Love is no one's private birthright or pedigree.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

चाहे क़ैस (मजनूँ) हो, कोहकन (फ़रहाद) हो या हाली, आशिक़ी किसी की बपौती या निजी जागीर नहीं होती।

विस्तार

हाली यहाँ मजनूँ (क़ैस) और फ़रहाद (कोहकन) जैसे अमर प्रेमियों के साथ ख़ुद का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि मोहब्बत किसी ख़ास शख़्स की बपौती या जागीर नहीं है। इश्क़ किसी ख़ानदान, दर्जे या हैसियत का मोहताज नहीं होता, बल्कि यह एक ऐसा जज़्बा है जो हर सच्चे दिल में बराबरी से धड़कता है। जब दिल में सच्चा दर्द और वफ़ा हो, तो कोई भी आम इंसान इन अफ़सानवी आशिक़ों के बराबर खड़ा हो सकता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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