“Akha, know them as demonic,Devotion to desire is a great harm.”
अखा, उन्हें आसुरी स्वभाव का समझो। इच्छाओं की भक्ति (पूजा) एक बड़ी हानि है।
अखा चेतावनी देते हैं कि हमें स्वार्थी इच्छाओं से प्रेरित 'आसुरी कुत्तों' जैसा नहीं होना चाहिए। वे कहते हैं कि किसी भी प्रकार की भक्ति या कार्य जो व्यक्तिगत आशाओं या अपेक्षाओं से उत्पन्न होते हैं, वह एक बड़ी आध्यात्मिक हानि है। अखा के अनुसार, सच्ची भक्ति वह नहीं है जिसमें हमें कुछ प्राप्त करने की इच्छा हो, बल्कि यह एक शुद्ध, निःस्वार्थ भेंट है। जब हमारे कार्य इच्छाओं से प्रेरित होते हैं, तो वे हमें भटका सकते हैं और हमें सच्ची शांति व आध्यात्मिक प्रगति से दूर रख सकते हैं। इसलिए, अपेक्षाओं को त्यागें और अपनी नीयत शुद्ध रखें।
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