“The knowledge of Brahman resided in Brahman's own domain,Within oneself, not even a trace of it came to remain.”
ब्रह्म का ज्ञान ब्रह्म के अपने क्षेत्र में ही रहा, स्वयं में उसका एक अंश भी नहीं आया।
यह दोहा समझाता है कि ब्रह्मविद्या, यानी परम सत्य का ज्ञान, वास्तव में ब्रह्म को ही प्रकट करने का माध्यम है। इसका अर्थ है कि ब्रह्मविद्या कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे आप बाहर से थोड़ा सा प्राप्त कर लें और अपने भीतर रख लें। बल्कि, यह गहरा ज्ञान स्वयं ब्रह्म की ओर इंगित करता है और उसे ही प्रकट करता है। इसे वास्तव में समझने के लिए, आप इसे केवल बाहरी रूप से धारण नहीं कर सकते; आपको उस परम सत्य के साथ एक होकर ही इसे अनुभव करना होगा। यह इस बात पर जोर देता है कि आध्यात्मिक ज्ञान बाहरी वस्तु की प्राप्ति नहीं, बल्कि एक आंतरिक स्थिति और अनुभव है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
