“When the mind its true self knew,Then all became one, equal and new.”
जब मन ने अपनी आत्म-पहचान प्राप्त की, तब सब कुछ समान हो गया।
यह प्यारा दोहा आंतरिक जागरण के एक गहरे पल को दर्शाता है। यह कहता है, 'जब मन अपनी सच्ची प्रकृति को पहचान लेता है, तब सब कुछ समान हो जाता है।' इसका अर्थ है कि जब हम अपने अहंकार से ऊपर उठकर हर अस्तित्व से अपने अंतर्निहित संबंध को समझते हैं, तो हमारे द्वारा किए गए भेद – अच्छे-बुरे, अमीर-गरीब, दोस्त-दुश्मन के बीच – मिटने लगते हैं। हम हर चीज़ और हर व्यक्ति में मौलिक एकता और समानता देखते हैं। यह गहन ज्ञान और शांति की स्थिति है, जहाँ निर्णय फीके पड़ जाते हैं, और सार्वभौमिक एकात्मता की भावना प्रबल होती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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