રાંધ્યાં ધાન વખાણતા જાય જેમ પીરસે તેમ ઝાઝાં ખાય;

“They go on praising the cooked food,The more it's served, the more they eat.”

— अखा भगत
अर्थ

वे पके हुए भोजन की प्रशंसा करते जाते हैं। जितना अधिक परोसा जाता है, उतना ही अधिक वे खाते हैं।

विस्तार

यह दोहा ऐसे व्यक्ति का वर्णन करता है जो भोजन की प्रशंसा करता रहता है, और जैसे-जैसे उसे परोसा जाता है, वह और अधिक खाता चला जाता है। यह एक ऐसे इंसान की तस्वीर पेश करता है जिसकी तारीफें शायद पूरी तरह से सच्ची न हों। ऐसा लगता है कि वह मेहमाननवाजी या उदारता का फायदा उठा रहा है, और केवल इसलिए अधिक खा रहा है क्योंकि यह उपलब्ध है, न कि सच्ची भूख या वास्तविक खुशी के कारण। यह उन लोगों पर एक हल्की टिप्पणी है जो ज़्यादा पाने के लिए दूसरों की चापलूसी कर सकते हैं, या जिनकी भूख कभी नहीं मिटती, बिना सच्ची सराहना या संयम के।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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