“Akha says, when Hari is known, dullness departs; Else, neither mind nor word can enter anywhere.”
अखा कहते हैं कि जब हरि को जाना जाता है, तब जड़ता दूर हो जाती है। अन्यथा, मन या वचन कहीं भी प्रवेश नहीं कर सकते।
कवि अखा कहते हैं कि हमारी अज्ञानता और जड़ता तभी दूर होती है जब परमात्मा हरि कृपा करते हैं। यह वही जानते हैं कि सच्ची समझ कैसे आती है। अगर हमें यह दैवीय कृपा या गहरी आंतरिक अनुभूति नहीं मिलती, तो सिर्फ मन में सोचने या मुंह से बातें कहने से कुछ नहीं होगा। हमारे विचार और शब्द हमें कहीं भी वास्तविक आध्यात्मिक प्रगति तक नहीं ले जा पाएंगे। सच्ची समझ केवल भीतर से आती है, ईश्वर की कृपा से, न कि केवल बाहरी दिखावे या बातों से।
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