અખા જ્ઞાતાની ન માને વાત સાચું કહે તાં ખીજે સાત.

“Akha, the words of the knowing are not believed,Speak truth, and seven will be aggrieved.”

— अखा भगत
अर्थ

अखा कहते हैं कि ज्ञानी व्यक्ति की बातें नहीं मानी जातीं। यदि कोई सच कहता है, तो सात लोग नाराज हो जाते हैं।

विस्तार

अखाजी का यह दोहा एक गहरी मानवीय प्रवृत्ति को दर्शाता है। वे कहते हैं कि लोग अक्सर ज्ञानी और समझदार व्यक्ति की बातों पर विश्वास नहीं करते। इससे भी बढ़कर, यदि कोई सच बोल दे, तो यह एक या दो को नहीं, बल्कि कई लोगों को नाराज कर देता है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि लोग सच्चाई के साथ कितने असहज हो सकते हैं, अक्सर वे अपनी स्थापित मान्यताओं या भ्रम को एक असुविधाजनक सत्य पर तरजीह देते हैं। यह ज्ञान और सत्य के प्रतिरोध का एक कालातीत अवलोकन है, जो अक्सर संघर्ष और क्रोध की ओर ले जाता है, खासकर जब गहराई से जड़े विचारों को चुनौती दी जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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