ઘરઘર મહાત્મ્ય વધારતા ફરે દામચામનાં જતનજ કરે;

“From house to house, they wander, augmenting their renown,Only guarding their wealth and honour within the town.”

— अखा भगत
अर्थ

वे घर-घर घूमते हुए अपनी महत्ता बढ़ाते हैं, और केवल अपने धन व सम्मान की रक्षा करते हैं।

विस्तार

यह दोहा उन लोगों की बात करता है जो हर जगह, हर घर में घूमते हैं, हमेशा अपनी खुद की महिमा और महत्व बढ़ाने की कोशिश करते रहते हैं। यह बताता है कि उनका मुख्य ध्यान केवल धन इकट्ठा करने और अपनी प्रतिष्ठा या प्रसिद्धि की रक्षा करने पर होता है। ऐसे व्यक्तियों को उन लोगों के रूप में देखा जाता है जो हर चीज़ से ऊपर भौतिक चीज़ों और बाहरी दिखावे को प्राथमिकता देते हैं, हमेशा अपनी व्यक्तिगत स्थिति को बेहतर बनाने और अपनी वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगे रहते हैं। यह आत्म-केंद्रित होने की प्रवृत्ति को उजागर करता है, जहाँ वे हमेशा दूसरों के सामने अपनी छवि और अपनी कमाई के बारे में चिंतित रहते हैं, बजाय गहरे मूल्यों के।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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