“A deep well with a broken spout,All that was learned, is rendered naught.”
गहरा कुआँ और फटा हुआ बोका। जो कुछ सीखा और सुना गया, वह सब व्यर्थ हो जाता है।
सोचिए, आप गहरे कुएँ से पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आपकी बाल्टी फटी हुई है। कुएँ में कितना भी पानी क्यों न हो, आप उसे ऊपर नहीं ला पाएँगे, है न? यह दोहा हमें एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात समझाता है। यहाँ 'गहरा कुआँ' हमारे सभी ज्ञान और सीख को दर्शाता है, जो कुछ भी हम सीखते या सुनते हैं। लेकिन अगर हमारी 'बाल्टी' – यानी हमारा मन या याददाश्त – फटी हुई बोख की तरह है, जो कुछ भी ग्रहण करती है उसे रोक नहीं पाती, तो वह सारा ज्ञान व्यर्थ हो जाता है। यह ऐसा है जैसे छलनी में पानी भरना। तो, यह हमें याद दिलाता है कि केवल ज्ञान प्राप्त करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे सही मायने में आत्मसात करना और याद रखना भी ज़रूरी है, ताकि वह हमारे लिए truly उपयोगी हो सके।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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