વિષયી જીવથી પ્રીતજ કરે તત્વદર્શી ઉપર અભાવજ ધરે;

“A worldly soul loves only worldly ties,And truth-seers, they only despise.”

— अखा भगत
अर्थ

विषयी जीव केवल सांसारिक विषयों में लीन जीवों से ही प्रेम करता है, और तत्वदर्शियों के प्रति केवल अरुचि ही रखता है।

विस्तार

यह दोहा उन लोगों के बारे में बताता है जो सांसारिक सुखों और भौतिक चीजों से बहुत आकर्षित होते हैं। वे जीवन के इन अस्थायी पहलुओं में खुशी और लगाव पाते हैं। क्योंकि उनका पूरा ध्यान केवल बाहरी दुनिया और उसके क्षणभंगुर आनंद पर होता है, इसलिए वे अक्सर उन लोगों से दूरी या अरुचि महसूस करते हैं जो गहरे सत्य, आध्यात्मिक ज्ञान या आंतरिक शांति की तलाश करते हैं। ऐसे सत्य-खोजने वाले, या 'तत्वदर्शी,' अलग मूल्यों से जीते हैं, जो इंद्रिय सुखों में डूबे व्यक्ति को अनुपयोगी या यहाँ तक कि खतरनाक लग सकते हैं। यह दोहा सतही लाभों के लिए जीए गए जीवन और वास्तविकता को समझने के लिए समर्पित जीवन के बीच के अंतर को उजागर करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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