“A blind father-in-law, a deaf daughter-in-law too, Yet all have gone, the holy tale to pursue.”
एक अंधा ससुर और एक बहरी बहू, दोनों ही कथा सुनने चल पड़े हैं।
यह गुजराती दोहा एक मजेदार तस्वीर पेश करता है: 'एक अंधे ससुर और एक बहरी बहू, सब कथा सुनने चले।' यह एक पुराना मुहावरा है जो उन स्थितियों को बखूबी समझाता है जहाँ लोग ऐसा कुछ करने की कोशिश करते हैं जिसके लिए वे पूरी तरह तैयार नहीं होते। कल्पना कीजिए, अंधे ससुर कुछ देख नहीं सकते और बहरी बहू कुछ सुन नहीं सकती, फिर भी सब कथा सुनने चले हैं। यह दोहा हमें यह बताता है कि कभी-कभी सामूहिक प्रयास अच्छे इरादों वाले हो सकते हैं, लेकिन अपनी मूल सीमाओं के कारण अंततः व्यर्थ साबित होते हैं। यह हमें अपनी क्षमताओं और अपने कार्यों के वास्तविक उद्देश्य पर विचार करने की याद दिलाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
