क़ैस का ज़िक्र मिरे शान-ए-जुनूँ के आगे अगले वक़्तों का कोई बादिया-पैमा होगा

“Why speak of Qais before the grandeur of my madness? He must have been merely some desert-wanderer of bygone times.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

मेरे दीवानेपन की शान के सामने क़ैस (मजनूँ) का क्या ज़िक्र, वह तो पुराने ज़माने का बस कोई रेगिस्तान में भटकने वाला रहा होगा।

विस्तार

यहाँ शायर इश्क़ के सबसे बड़े प्रतीक 'क़ैस' (मजनूँ) की दीवानगी को भी अपने आगे मामूली बता रहा है। मजनूँ भले ही रेगिस्तानों की ख़ाक छानने के लिए मशहूर रहा हो, पर शायर का मानना है कि उसके अपने जुनूँ की शान इतनी बुलंद है कि क़ैस तो बस बीते ज़माने का एक आम सा मुसाफ़िर लगता है। यह इश्क़ में उस बेपनाह दीवानगी का ख़ुद्दार इज़हार है, जो सदियों पुरानी हर दास्तान से आगे निकल चुकी है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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