हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है डाका तो नहीं मारा चोरी तो नहीं की है

“Why is such an uproar raised if I have sipped a little wine? I haven't committed robbery, nor stolen what wasn't mine.”

— अकबर इलाहाबादी
अर्थ

अगर थोड़ी सी शराब पी ही ली है तो इतना हंगामा क्यों मचा हुआ है? मैंने कोई डाका तो नहीं डाला और न ही कोई चोरी की है।

विस्तार

यह शेर बड़े ही चुटीले और बेबाक अंदाज़ में समाज के दोहरे चरित्र और पाखंड पर चोट करता है। शायर सवाल करता है कि अगर उसने अपने दर्द को भुलाने के लिए ज़रा सी मय पी ली, तो इतना बखेड़ा क्यों खड़ा हो गया, जबकि उसने किसी का हक़ या दौलत नहीं छीनी। यहाँ शराब केवल नशा नहीं, बल्कि आज़ाद ख़याली और रस्म-ओ-रिवाज की बेड़ियों से आज़ादी का प्रतीक है, जिसे दुनिया बर्दाश्त नहीं कर पाती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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