“Chastened by life's sobering truths, no remedy do I require; this frailty is born of sorrow, I am not truly ill.”
मैं नसीहत और हक़ीक़त देखकर उदास हूँ, मुझे दवा की कोई ज़रूरत नहीं है। मेरी यह कमज़ोरी ग़म की वजह से है, मैं बीमार नहीं हूँ।
शायर यहाँ अपनी कमज़ोरी को देखकर दवा लाने वालों से मुख़ातिब है और बड़ी सादगी से कहता है कि उसका जिस्म किसी मर्ज़ से नहीं, बल्कि ज़िंदगी की तल्ख़ सच्चाइयों के ग़म से पस्त हुआ है। उसने दुनिया की बेवफ़ाई और फ़ना को इतने क़रीब से देखा है कि दिल अंदर से उदास हो चुका है। जब थकान रूह और दिल की हो, तो भला दुनिया की कोई दवा या हकीम उसे कैसे ठीक कर सकता है?
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