“Whatever new ground opens up in the slayer's street / Is consecrated at once for the martyrs' graves.”
क़ातिल (महबूब) की गली में जो भी नई ज़मीन निकलती है, वह तुरंत शहीदों (आशिक़ों) की मज़ार के लिए समर्पित (वक़्फ़) हो जाती है।
यह शेर इश्क़ में ख़ुद को मिटा देने वाले दीवानों के जज़्बे की एक बेहद पुरअसर तस्वीर पेश करता है। महबूब की गली में जान न्योछावर करने वालों का ऐसा ताँता लगा है कि जैसे ही कोई नया कोना या ज़मीन का टुकड़ा निकलता है, वह फ़ौरन किसी शहीद-ए-वफ़ा की मज़ार के नाम हो जाता है। यहाँ आशिक़ की मौत कोई मातम नहीं, बल्कि मोहब्बत की राह में सरफ़रोशी का सबसे बड़ा एज़ाज़ बन जाती है।
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