غزل

جو ہو سکتا ہے اس سے وہ کسی سے ہو نہیں سکتا

جو ہو سکتا ہے اس سے وہ کسی سے ہو نہیں سکتا
داغ دہلوی· Ghazal· 17 shers· radif: से हो नहीं सकता

یہ غزل انسانی بے بسی اور وجودی کرب کی عکاسی کرتی ہے جس میں انسان کی محدود طاقت اور مجبوری کا احاطہ کیا گیا ہے۔ عشق اور تقدیر کے سامنے لاچاری کو بیان کرتے ہوئے شاعر ظاہر کرتا ہے کہ زندگی تو درکنار، انسان کو اپنی موت پر بھی کوئی اختیار حاصل نہیں۔

Source: rekhta · HI

نغمہ سنیں
ابھی نغمہ نہیں
رسم الخط
1
जो हो सकता है उस से वो किसी से हो नहीं सकता मगर देखो तो फिर कुछ आदमी से हो नहीं सकता
جو ہو سکتا ہے اس سے وہ کسی سے ہو نہیں سکتا مگر دیکھو تو پھر کچھ آدمی سے ہو نہیں سکتا
2
मोहब्बत में करे क्या कुछ किसी से हो नहीं सकता मिरा मरना भी तो मेरी ख़ुशी से हो नहीं सकता
محبت میں کرے کیا کچھ کسی سے ہو نہیں سکتا مرا مرنا بھی تو میری خوشی سے ہو نہیں سکتا
3
अलग करना रक़ीबों का इलाही तुझ को आसाँ है मुझे मुश्किल कि मेरी बेकसी से हो नहीं सकता
الگ کرنا رقیبوں کا الٰہی تجھ کو آساں ہے مجھے مشکل کہ میری بیکسی سے ہو نہیں سکتا
4
किया है वादा-ए-फ़र्दा उन्हों ने देखिए क्या हो यहाँ सब्र ओ तहम्मुल आज ही से हो नहीं सकता
کیا ہے وعدۂ فردا انہوں نے دیکھیے کیا ہو یہاں صبر و تحمل آج ہی سے ہو نہیں سکتا
5
ये मुश्ताक़-ए-शहादत किस जगह जाएँ किसे ढूँडें कि तेरा काम क़ातिल जब तुझी से हो नहीं सकता
یہ مشتاق شہادت کس جگہ جائیں کسے ڈھونڈیں کہ تیرا کام قاتل جب تجھی سے ہو نہیں سکتا
6
लगा कर तेग़ क़िस्सा पाक कीजिए दाद-ख़्वाहों का किसी का फ़ैसला कर मुंसिफ़ी से हो नहीं सकता
لگا کر تیغ قصہ پاک کیجئے دادخواہوں کا کسی کا فیصلہ کر منصفی سے ہو نہیں سکتا
7
मिरा दुश्मन ब-ज़ाहिर चार दिन को दोस्त है तेरा किसी का हो रहे ये हर किसी से हो नहीं सकता
مرا دشمن بظاہر چار دن کو دوست ہے تیرا کسی کا ہو رہے یہ ہر کسی سے ہو نہیں سکتا
8
पुर्सिश कहोगे क्या वहाँ जब याँ ये सूरत है अदा इक हर्फ़-ए-वादा नाज़ुकी से हो नहीं सकता
پرسش کہو گے کیا وہاں جب یاں یہ صورت ہے ادا اک حرف وعدہ نازکی سے ہو نہیں سکتا
9
न कहिए गो कि हाल-ए-दिल मगर रंग-आश्ना हैं हम ये ज़ाहिर आप की क्या ख़ामुशी से हो नहीं सकता
نہ کہئے گو کہ حال دل مگر رنگ آشنا ہیں ہم یہ ظاہر آپ کی کیا خامشی سے ہو نہیں سکتا
10
किया जो हम ने ज़ालिम क्या करेगा ग़ैर मुँह क्या है करे तो सब्र ऐसा आदमी से हो नहीं सकता
کیا جو ہم نے ظالم کیا کرے گا غیر منہ کیا ہے کرے تو صبر ایسا آدمی سے ہو نہیں سکتا
11
चमन में नाज़ बुलबुल ने किया जो अपनी नाले पर चटक कर ग़ुंचा बोला क्या किसी से हो नहीं सकता
چمن میں ناز بلبل نے کیا جو اپنی نالے پر چٹک کر غنچہ بولا کیا کسی سے ہو نہیں سکتا
12
नहीं गर तुझ पे क़ाबू दिल है पर कुछ ज़ोर हो अपना करूँ क्या ये भी तो ना-ताक़ती से हो नहीं सकता
نہیں گر تجھ پہ قابو دل ہے پر کچھ زور ہو اپنا کروں کیا یہ بھی تو نا طاقتی سے ہو نہیں سکتا
13
न रोना है तरीक़े का न हँसना है सलीक़े का परेशानी में कोई काम जी से हो नहीं सकता
نہ رونا ہے طریقے کا نہ ہنسنا ہے سلیقے کا پریشانی میں کوئی کام جی سے ہو نہیں سکتا
14
हुआ हूँ इस क़दर महजूब अर्ज़-ए-मुद्दआ कर के कि अब तो उज़्र भी शर्मिंदगी से हो नहीं सकता
ہوا ہوں اس قدر محجوب عرض مدعا کر کے کہ اب تو عذر بھی شرمندگی سے ہو نہیں سکتا
15
ग़ज़ब में जान है क्या कीजे बदला रंज-ए-फ़ुर्क़त का बदी से कर नहीं सकते ख़ुशी से हो नहीं सकता
غضب میں جان ہے کیا کیجے بدلہ رنج فرقت کا بدی سے کر نہیں سکتے خوشی سے ہو نہیں سکتا
16
मज़ा जो इज़्तिराब-ए-शौक़ से आशिक़ को है हासिल वो तस्लीम ओ रज़ा ओ बंदगी से हो नहीं सकता
مزا جو اضطراب شوق سے عاشق کو ہے حاصل وہ تسلیم و رضا و بندگی سے ہو نہیں سکتا
17
ख़ुदा जब दोस्त है ऐ 'दाग़' क्या दुश्मन से अंदेशा हमारा कुछ किसी की दुश्मनी से हो नहीं सकता
خدا جب دوست ہے اے داغؔ کیا دشمن سے اندیشہ ہمارا کچھ کسی کی دشمنی سے ہو نہیں سکتا
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