शब्दार्थ
हसरत-कशों
hasrat-kashon
अर्थ
अतृप्त इच्छाओं और शोक को झेलने वाले लोग।
विस्तार
उर्दू शायरी में 'हसरत-कश' उन आशिक़ों को कहा जाता है जो अधूरी इच्छाओं और विरह के दर्द का बोझ निरंतर उठाते हैं। इस शेर में इसका आशय उन भावुक प्रेमियों से है जिनकी आंतरिक तड़प ही उनके लिए नशा बन जाती है, अतः उन्हें शराब और प्याले जैसे बाहरी साधनों की आवश्यकता नहीं रहती। उनका आंतरिक विषाद ही उन्हें सौंदर्य के गूढ़ अर्थ का अनुभव कराता है।
व्युत्पत्ति
Compound formed from Arabic 'ḥasrah' (intense longing, sorrow, regret) and the Persian active suffix 'kash' (from 'kashīdan', to pull, draw, or endure).
प्रयोग
A staple trope in classical ghazal poetry used to depict melancholic lovers who preserve and nurture their unfulfilled yearning as a noble form of spiritual anguish.
उदाहरण
हसरत-कशों की आँख में दुनिया ख़िज़ाँ रही
हम हसरत-कशों को मय-ख़ाने से क्या सरोकार
