शब्दार्थ
हल-मिम-मज़ीद
hal-mim-mazid
hiphrase
अर्थ
‘क्या कुछ और भी है?’; असीमित चाह या तृष्णा।
विस्तार
क़ुरआन की एक आयत का वाक्यांश जिसमें दोज़ख़ पूछती है 'क्या कुछ और भी है?'; शायरी में यह कभी न बुझने वाली प्यास और इश्क़ के दर्दों की असीमित चाहत की तल्मीह (संकेत) है। इस शेर में प्रेमी की आत्मा पनाह या राहत माँगने के बजाय और अधिक पीड़ा सहने का तराना गा रही है।
व्युत्पत्ति
Arabic, from the Quranic verse (Surah Qaf 50:30), composed of 'hal' (interrogative particle), 'min' (from/any), and 'mazīd' (increase/more), assimilated phonetically as hal-mim-mazīd.
प्रयोग
Frequently used as a classical allusion (talmīh) to illustrate a lover's insatiable capacity for suffering or spiritual longing rather than praying for relief.
उदाहरण
तिश्नगी का हर नया दौर पुकारे हल-मिम-मज़ीद
शौक़-ए-फ़ुज़ूँ का तराना बना हल-मिम-मज़ीद
समानार्थी
तलबतिश्नगी-ए-ना-तमामहवस-ए-फ़ज़ूँ
संबंधित शब्द
अल-अमाँतिश्नगीतरानाज़मज़मा
