शब्दार्थ
हिज्राँ
hijrān
hinoun
अर्थ
प्रिय से विरह, जुदाई या वियोग की अवस्था।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'हिज्राँ' का अर्थ महबूब से वियोग और जुदाई की दारुण पीड़ा है। प्रस्तुत शेर में यह 'शब-ए-हिज्राँ' (विरह की रात) के रूप में प्रयुक्त हुआ है, जो आशिक़ की तड़प, बेचैनी और नाला-ओ-फ़रियाद से भरी रात को दर्शाता है। यह शब्द विरह के उस गहन दर्द का प्रतीक है जहाँ सिरहाने सिर टिकाना भी मुमकिन नहीं होता।
व्युत्पत्ति
From Arabic root h-j-r (to abandon, forsake), developed into Persian as 'hijrān' (separation), and borrowed into Urdu.
प्रयोग
In the ghazal, it is predominantly used in compounds like 'shab-e-hijrān' to dramatize the lover's nocturnal misery and longing.
उदाहरण
शब-ए-हिज्राँ की दराज़ी
ग़म-ए-हिज्राँ में जलना
समानार्थी
फ़िराक़जुदाईहिज्रफ़ुर्क़त
संबंधित शब्द
शब-ए-हिज्राँग़म-ए-हिज्राँवस्लफ़ुर्क़त
