शब्दार्थ
सहरा-गर्द
sahra-gard
hinoun / adjective
अर्थ
रेगिस्तान में भटकने वाला; जंगल की ख़ाक छानने वाला।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'सहरा-गर्द' उस व्यक्ति को कहते हैं जो मरुस्थल या वीराने की ख़ाक छानता फिरता है। प्रस्तुत शे'र में यह मजनूँ के विशेषण के रूप में आया है, जिसे इश्क़ के जुनून ने बस्ती से दूर वीराने में भटकने पर विवश कर दिया। यह शब्द सांसारिक बंधनों से मुक्ति और आशिक़ की वहशत का प्रतीक है।
व्युत्पत्ति
Arabic 'ṣaḥrā' (desert, wilderness) + Persian root '-gard' (wanderer, roamer, from 'gardīdan').
प्रयोग
A common poetic trope representing the distraught lover (particularly Majnun) roaming barren lands after losing all worldly reason.
उदाहरण
सहरा-गर्द आशिक़ को शहर का सुकून रास नहीं आता।
इश्क़ के जुनून ने उसे सहरा-गर्द बना दिया।
समानार्थी
सहरा-नवरदबयाबाँ-गर्दख़ाक-बसरआवारा-गर्द
संबंधित शब्द
सहरावहशतगर्दिशमजनूँ
