शब्दार्थ
सहर-ख़ेज़ी
sahar-khezi
अर्थ
सुबह सवेरे उठने का नियम या आदत; प्रातःजागरण।
विस्तार
सहर-ख़ेज़ी का अर्थ है भोर के समय तड़के जागने का नियम अथवा आदत, जिसे आध्यात्मिक साधना या नमाज़ से जोड़ा जाता है। इस शेर में यह लंदन की हाड़ कंपाने वाली सर्द हवाओं के बावजूद अपनी सुबह की इबादत और तहज़ीबी रिवायत को न छोड़ने का प्रतीक है। यह शायर के आत्म-अनुशासन और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने को दर्शाता है।
व्युत्पत्ति
Compound of Arabic 'sahar' (dawn/early morning) and Persian 'khez' (root of 'khashtan', to rise) with the abstract noun suffix '-i'.
प्रयोग
In classical Urdu poetry, sahar-khezi is often praised as a noble virtue of the pious, the scholar, or the yearning lover seeking silent communion at dawn.
उदाहरण
आदाब-ए-सहर-ख़ेज़ी से रूह को सुकून मिलता है।
सहर-ख़ेज़ी की आदत ने उसे कभी ग़ाफ़िल न होने दिया।
