शब्दार्थ
सरीर
sarīr
hinoun
अर्थ
लिखते समय क़लम से निकलने वाली चरचराहट की आवाज़
विस्तार
शास्त्रीय काव्य में 'सरीर' काग़ज़ पर सरकंडे की क़लम चलने की चरमराहट या किवाड़ के चरमराने की आवाज़ को कहते हैं। इस शेर में 'सरीर-ए-ख़ामा' (क़लम की सरसराहट) को दिल का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ के समान बताया गया है। यह शब्द शायरी रचने की भौतिक ध्वनि और हार्दिक अभिव्यक्ति का सुंदर रूपक है।
व्युत्पत्ति
Arabic root ص-ر-ر (ṣ-r-r), referring to a squeaking, grating, or creaking sound.
प्रयोग
Conventionally compounded with 'khāma' (pen) as 'sarīr-e-khāma' to romanticize the physical noise of literary creation in ghazals.
उदाहरण
सरीर-ए-ख़ामा की दिलकश सदा
किवाड़ की सरीर से चौंक पड़ना
समानार्थी
चरचराहटखड़खड़ाहटआवाज़
संबंधित शब्द
ख़ामाइस्तिकाकक़लमसुख़न
