शब्दार्थ

सत्ह

sat'h

hinoun

अर्थ

सतह, समतल फैलाव या जल-विस्तार।

विस्तार

शास्त्रीय शायरी में 'सत्ह' का अर्थ किसी चीज़ का ऊपरी हिस्सा, समतल चादर या फैलाव होता है। इस शे'र में इसका आशय प्रेमी के रोने से बाहर फैले उस अथाह जल-विस्तार से है जो क्षितिज तक फैला दिखता है। यह आशिक़ के अत्यधिक आंसुओं के मर्सियाई प्रभाव को दर्शाता है।

व्युत्पत्ति

Arabic root s-t-h (س-ط-ح), denoting spreading out, flattening, or a plane surface.

प्रयोग

In ghazal poetry, it often appears in izafat constructions like 'sat'h-e-aab' (water's surface) or to contrast external superficiality with internal depth.

उदाहरण

सत्ह-ए-आब पर तिनके की तरह

ज़मीन की सत्ह

समानार्थी

सतहचादरविस्तार

संबंधित शब्द

सत्ह-ए-आबसत्हीमुसत्तह
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