शब्दार्थ

सोहबत-मुख़ालिफ़

sohbat-muḳhālif

hiadjective

अर्थ

प्रतिकूल या बेमेल संगति; असंगत साथ।

विस्तार

यह सामासिक पद ऐसे साथ या परिवेश को दर्शाता है जो व्यक्ति के मूल स्वभाव के प्रतिकूल और बेमेल हो। इस शेर में यह अस्तित्व के असहज विरोधाभास को व्यक्त करता है, जैसे फूल का भट्टी में और तिनके का चमन में होना। यह अनुपयुक्त संगति से उत्पन्न अलगाव और विवशता को प्रकट करता है।

व्युत्पत्ति

Arabic: 'suhbah' (companionship, society) + 'mukhālif' (contrary, opposing).

प्रयोग

In classical ghazal, it is invoked to articulate the misery of a sensitive lover or thinker misplaced among coarse or unappreciative companions.

उदाहरण

सोहबत-मुख़ालिफ़ से तन्हाई का कोना कहीं बेहतर है।

उम्र भर सोहबत-मुख़ालिफ़ की तकलीफ़ उठानी पड़ी।

समानार्थी

ना-मुवाफ़िक़बेमेल संगतबद-सोहबत

संबंधित शब्द

सोहबतमुख़ालिफ़गुलख़नगुलशन
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