शब्दार्थ

सूरत-गर

soorat-gar

hinoun

अर्थ

चित्रकार, मूर्तिकार अथवा रूप रचने वाला।

विस्तार

शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'सूरत-गर' का तात्पर्य रूप गढ़ने वाले चित्रकार या मूर्तिकार से होता है। इस शे'र में 'सूरत-गर-ए-अज़ल' के रूप में यह अनादि सृष्टिकर्ता (ईश्वर) की ओर संकेत करता है, जिसने महबूब की तलवार जैसी तीखी भौंहें रचीं। यह शब्द अक्सर कलात्मक निपुणता और बेमिसाल हुस्न की रचना के संदर्भ में प्रयुक्त होता है।

व्युत्पत्ति

From Arabic 'ṣūrah' (form, face, appearance) combined with the Persian agentive suffix '-gar' (maker, doer).

प्रयोग

In ghazal poetry, it often personifies God as the supreme artist who created the beloved's unmatched perfection.

उदाहरण

सूरत-गर-ए-जहाँ का हर नक़्श है अनोखा

हैरान है तिरे हुस्न पे सूरत-गर

समानार्थी

मुसव्विरनक़्क़ाशबुत-तराशचित्रकार

संबंधित शब्द

सूरततस्वीरकारीगरअज़ल
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