शब्दार्थ

सियह-बेहार

siyah-bihār

hinoun phrase

अर्थ

काले सागर या समुद्रों की असीम स्याही

विस्तार

यह शब्द सागरों के अथाह जल या स्याही की ओर संकेत करता है, जो प्रसिद्ध क़ुरआनी रूपक पर आधारित है कि यदि सारे वृक्ष क़लम और सभी समुद्र स्याही बन जाएँ तब भी ईश्वरीय महिमा नहीं लिखी जा सकती। इस शेर में यह परमात्मा के असीम गुणों को कलमबद्ध करने में सृष्टि के संपूर्ण साधनों की असमर्थता को व्यक्त करता है।

व्युत्पत्ति

Persian 'siyāh' (black) combined with Arabic 'bihār' (plural of bahr, sea/ocean).

प्रयोग

Used primarily in devotional verse (hamd and naat) as a rhetorical allusion (talmih) to convey the impossibility of enumerating the divine attributes.

उदाहरण

सियह-बेहार भी तिश्नगी-ए-क़लम बुझा न सके।

अश्जार ओ सियह-बेहार से भी वह दास्ताँ मुकम्मल न हुई।

समानार्थी

सियह-बहरआब-ए-सियहबहर-ए-स्याह

संबंधित शब्द

अश्जारख़ामाबहरसिफ़ात
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