शब्दार्थ

सीमाब-पुश्त

seemaab-pusht

hiadjective

अर्थ

पारे की कलई वाला, दर्पण की पीठ पर पारा लगा हुआ।

विस्तार

शाब्दिक रूप से इसका अर्थ है वह दर्पण जिसकी पीठ पर पारे की कलई चढ़ाई गई हो। शास्त्रीय शायरी में पारा निरंतर बेचैनी, गति और ताप का रूपक माना जाता है। इस शेर में यह शब्द दिल की बेचैनी और आईने की अंतर्निहित तड़प को दर्शाने के लिए प्रयुक्त हुआ है।

व्युत्पत्ति

Persian compound formed of 'sīmāb' (mercury/quicksilver, from 'sīm' [silver] + 'āb' [water]) and 'pusht' (back).

प्रयोग

In the ghazal tradition, it serves as a delicate metaphor linking the reflective backing of mirrors to inner agitation and quivering yearning.

उदाहरण

आईना-ए-सीमाब-पुश्त की मानिंद लरज़ता दिल

सीमाब-पुश्त नज़र की बेताबी

समानार्थी

सीमाब-सिफ़तबे-क़रारमुज़्तरिब

संबंधित शब्द

सीमाबआईनाबे-क़रारीहैरत
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