शब्दार्थ
सुब्हा-गर्दां
subḥa-gardāñ
hiadjective
अर्थ
तस्बीह (माला) फेरने वाला; निरंतर जप में मग्न
विस्तार
इसका शाब्दिक अर्थ है तस्बीह या माला के दानों को फेरने वाला। प्रस्तुत शे'र में यह ज़ाहिरी इबादत और संयम में बंधे रहने का प्रतीक है, जहाँ शायर अफ़सोस ज़ाहिर करता है कि उसका हाथ सुबू (शराब की सुराही) तक न पहुँच सका और वह महज़ तस्बीह फेरता रह गया।
व्युत्पत्ति
Compound of Arabic 'subḥah' (rosary, prayer beads) and Persian 'gardān' (turning/revolving, from 'gardīdan').
प्रयोग
In classical Urdu ghazal, it is often paired antithetically with 'bāda-kash' (wine drinker) or 'subū' (wine flagon) to satirize orthodox asceticism.
उदाहरण
सुब्हा-गर्दां-ए-सहर (सुबह के वक़्त तस्बीह फेरने वाला)
हज़ार सुब्हा-गर्दां (हज़ारों माला फेरने वाले)
समानार्थी
तस्बीह-ख़्वांमाला-जपज़ाहिद
संबंधित शब्द
सुब्हातस्बीहसुबूगर्दिश
