शब्दार्थ
सिफ़ात
sifāt
अर्थ
विशेषताएं, गुण, लक्षण या ईश्वर के विभिन्न रूप।
विस्तार
सूफ़ी दर्शन और शायरी में 'सिफ़ात' ईश्वर के उन गुणों और लक्षणों को कहा जाता है जो सृष्टि में प्रकट होते हैं, जबकि 'ज़ात' उसका मूल और अप्रकट अस्तित्व है। प्रस्तुत शेर में ग़ालिब ने 'पैमाना-ए-सिफ़ात' का उल्लेख किया है, जहाँ सिफ़ात को प्याला और ज़ात को मदिरा माना गया है। ज्ञानी साधक इन बाहरी गुणों के माध्यम से ही मूल तत्व के आनंद में लीन होता है।
व्युत्पत्ति
Arabic: plural of 'sifah' (صِفَة), derived from the root w-s-f (و-ص-ف), relating to description, quality, or attribute.
प्रयोग
In classical Urdu ghazal, 'sifāt' is almost invariably paired against 'zāt' to explore theological distinctions between appearance and underlying reality.
उदाहरण
ज़ात की पहचान बिना सिफ़ात के मुमकिन नहीं।
सिफ़ात के आईने में उसका जल्वा नज़र आता है।
