शब्दार्थ
सिपंद
sipand
hinoun
अर्थ
हरमल के बीज जो नज़र उतारने के लिए आग में सुलगाए जाते हैं।
विस्तार
सिपंद हरमल के दानों को कहते हैं जिन्हें नज़र-ए-बद टालने के लिए आग पर जलाया जाता है, जो जलते समय तड़पकर उछलते हैं और गहरा धुआँ छोड़ते हैं। शायरी में यह प्रेमी के दिल की बेचैनी, सोज़ और तड़प का प्रसिद्ध प्रतीक है। प्रस्तुत शेर में 'दूद-ए-सिपंद' (सुलगते सिपंद का धुआँ) दिल के काले दाग (सुवैदा) से होंठों तक उठने वाली आह की ज़ंजीर बन गया है।
व्युत्पत्ति
Persian (ispand / sipand, wild rue seeds).
प्रयोग
In Urdu ghazal, sipand is frequently coupled with fire to express the lover's frantic, involuntary writhing and uncontrollable sighs.
उदाहरण
मिस्ल-ए-सिपंद आतिश पे तड़पना
दूद-ए-सिपंद की तरह उठता हुआ आह का सिलसिला
समानार्थी
हरमलइस्फ़ंद
संबंधित शब्द
दूद-ए-सिपंदआतिशसुवैदासोज़
