शब्दार्थ
सोज़
soz
hinoun
अर्थ
जलन, तीव्र तड़प, आंतरिक ताप या विरह-वेदना।
विस्तार
शाब्दिक रूप से इसका अर्थ जलन अथवा आग की तपन है, लेकिन काव्य में यह प्रेम की तड़प, हार्दिक पीड़ा या तीव्र अभिलाषा का प्रतीक है। प्रस्तुत शेर में 'सोज़-ए-आरज़ू' का तात्पर्य इच्छा या तमन्ना की उस सुलगती हुई तड़प से है, जो हरम के दिल में अभी तक जाग्रत नहीं हुई है। यह भावुकता और आंतरिक बेचैनी का द्योतक है जो निष्प्राण इबादत में जान फूंकती है।
व्युत्पत्ति
Persian (سوز), from the present stem of the verb 'sōkhtan' (سوختن), meaning 'to burn'.
प्रयोग
Frequently paired with 'गुदाज़' (gudāz) as 'सोज़-ओ-गुदाज़' to depict the poignant, melting intensity of heartfelt grief or passionate love in the ghazal.
उदाहरण
सोज़-ए-दिल की दास्तान
सोज़-ओ-गुदाज़-ए-इश्क़
समानार्थी
जलनतपनतड़पसोज़िश
संबंधित शब्द
सोज़-ओ-गुदाज़सोज़ाँसोख़्ता
