शब्दार्थ
साँग
saang
hinoun
अर्थ
स्वाँग, नाटक, प्रपंच या तमाशा।
विस्तार
काव्य में 'साँग' का अर्थ नाटक, स्वाँग, तमाशा अथवा सांसारिक प्रपंच है। प्रस्तुत शेर में यह 'रात थोड़ी और स्वाँग बहुत' वाली प्रसिद्ध कहावत की ओर संकेत करता है, जिसका भाव यह है कि जवानी और जीवन की अवधि अल्प है किंतु सांसारिक खेल और ज़िम्मेदारियाँ अत्यधिक हैं।
व्युत्पत्ति
Derived from Sanskrit 'स्वाङ्ग' (svāṅga) meaning one's own body or role-playing, developing through Prakrit into Hindustani as 'swāng' and 'sāng'.
प्रयोग
In ghazal poetry, it is frequently employed idiomatically to satirize worldly illusions, pretenses, or the heavy burden of worldly affairs.
उदाहरण
दुनिया का यह साँग पल भर में ख़त्म हो गया।
रात ढलने को आई मगर साँग अभी बाक़ी था।
समानार्थी
स्वाँगनाटकतमाशाढोंग
संबंधित शब्द
स्वाँगनौटंकीतमाशाबहुरूपिया
