शब्दार्थ

सुख़न-रस

sukhan-ras

hiadjective

अर्थ

शायरी का पारखी या कद्रदान; कलाम का मर्मज्ञ।

विस्तार

यह फ़ारसी सामासिक पद है जिसका अर्थ शायरी के मर्म तक पहुँचने वाला अथवा काव्य-पारखी होता है। इक़बाल के प्रस्तुत शे'र में यह शब्द उस्मानी तुर्क की काव्य-मर्मज्ञता और कद्रदानी को इंगित करता है। यह साहित्य में ऐसे श्रोता या पाठक को दर्शाता है जो गूढ़ भावों को समझ सके।

व्युत्पत्ति

Persian: 'sukhan' (speech, word, poetry) + 'ras' (agent noun from 'rasīdan', to reach/attain).

प्रयोग

Commonly used in classical ghazal to praise an astute patron, listener, or beloved capable of understanding subtle poetic metaphors.

उदाहरण

उस महफ़िल में कोई सुख़न-रस न मिला।

सुख़न-रस के लिए एक लफ़्ज़ ही काफ़ी है।

समानार्थी

सुख़न-फ़हमसुख़न-शनासनुक्ता-रसक़द्र-दाँ

संबंधित शब्द

सुख़नसुख़न-वरसुख़न-गोसुख़न-दानी
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