शब्दार्थ
सुख़न-दाँ
sukhan-dāñ
hinoun
अर्थ
शायरी का पारखी, काव्य-मर्मज्ञ या कुशल कवि।
विस्तार
शास्त्रीय काव्य में 'सुख़न-दाँ' का अर्थ शायरी का मर्मज्ञ, कद्रदान या निपुण शायर होता है जो कला की बारीकियों को भली-भाँति समझता है। प्रस्तुत शे'र में इसका प्रयोग उस गंभीर रचनाकार के लिए हुआ है, जिससे बिना सोच-विचार और साधना के उम्दा शे'र नहीं बनता।
व्युत्पत्ति
Persian: sukhan (speech/verse) + dān (present stem of dānistan, 'to know').
प्रयोग
Frequently invoked in classical Urdu ghazals by poets addressing the ideal literary audience or highlighting their own poetic dedication.
उदाहरण
महफ़िल में किसी सुख़न-दाँ की मौजूदगी कला को नई जान देती है।
शे'र की नज़ाकत को सिर्फ़ सुख़न-दाँ ही परख सकता है।
समानार्थी
सुख़न-फ़हमसुख़न-शनासनुक्ता-दाँ
संबंधित शब्द
सुख़नसुख़न-वरीसुख़न-तराज़
