शब्दार्थ
सोख़्ता-जाँ
sokhta-jaan
hiadjective
अर्थ
जली हुई रूह वाला; विरह या पीड़ा से दग्ध।
विस्तार
उर्दू काव्य परंपरा में 'सोख़्ता-जाँ' उस आशिक़ या पीड़ित को कहते हैं जिसकी आत्मा विरह या दर्द की आग में भस्म हो चुकी हो। इस शेर में शायर अपनी पहचान सांसारिक तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसे दग्ध अस्तित्व के रूप में कराता है जिसके सीने से लपटें फूट रही हैं। यह शब्द आंतरिक संताप और प्रेम की चरम विभीषिका को व्यक्त करता है।
व्युत्पत्ति
Persian compound of sokhta (burnt, past participle of sukhtan) and jan (soul, life).
प्रयोग
Frequently used in classical ghazals to describe the archetype of a self-consuming, suffering lover.
उदाहरण
सोख़्ता-जाँ की सदा रात के सन्नाटे में गूँज उठी।
हाल उस सोख़्ता-जाँ का न पूछो जो हर लम्हा जलता रहा।
समानार्थी
सोख़्ता-दिलआतिश-दीदादर्द-रसीदाजला-भुना
संबंधित शब्द
सोख़्ताजाँशो'ला-फ़िशाँआतिश
