शब्दार्थ
साक़ी-ब-जल्वा
saaqii-ba-jalwa
hinoun phrase
अर्थ
साक़ी अपने पूरे सौंदर्य और चमक के साथ।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू शायरी में यह पद उस साक़ी को दर्शाता है जो अपनी पूरी नज़ाकत और चमक-दमक के साथ सामने आया हो। प्रस्तुत शे'र में साक़ी का यह रूप-सौंदर्य देखने वाले के ईमान और समझ-बूझ को मिटा देने वाला शत्रु बताया गया है।
व्युत्पत्ति
Arabic saaqi (cupbearer) + Persian preposition ba (with, in) + Arabic jalwah (manifestation, splendor).
प्रयोग
Commonly employed in Sufi and ghazal traditions to dramatize the spiritually destabilizing, intoxicating power of divine or earthly beauty.
उदाहरण
साक़ी-ब-जल्वा जब महफ़िल में आया, सब होश खो बैठे।
नज़र साक़ी-ब-जल्वा पर पड़ते ही ज़ाहिद की तौबा टूट गई।
समानार्थी
जल्वा-रेज़ साक़ीसाक़ी-ए-गुल-चेहरासाक़ी-ए-मह-रू
संबंधित शब्द
साक़ीजल्वामुतरिब-ब-नग़्मामय-ख़ाना
