शब्दार्थ
शैख़-साहिब
Shaikh-sahib
अर्थ
धर्मगुरु या सम्मानित बुज़ुर्ग, शायरी में अक्सर व्यंग्यात्मक संबोधन।
विस्तार
शास्त्रीय उर्दू शायरी में 'शैख़-साहिब' धार्मिक उपदेशक या रूढ़िवादी बुज़ुर्ग का प्रतीक है, जिस पर सूफ़ी या रिंद कवि अक्सर व्यंग्य करते हैं। इस शे'र में शैख़-साहिब के सतही दिखावे का मज़ाक उड़ाया गया है, जिन्हें आत्म-विस्मृति की रूहानी सोहबत का अदब नहीं आता और वे महज़ कूदना जानते हैं। यह लफ़्ज़ दिखावटी तक़वे और रूहानी बेख़ुदी के फ़र्क़ को उजागर करता है।
व्युत्पत्ति
Arabic 'shaykh' (elder, venerable leader) combined with Arabic-derived honorific 'sahib' (master, gentleman, companion).
प्रयोग
In the ghazal tradition, Shaikh-sahib serves as the conventional satirical archetype of hypocritical or dry orthodoxy, placed in opposition to the sincere lover and wine-drinker.
उदाहरण
शैख़-साहिब की नसीहत का असर कुछ न हुआ
मयख़ाने में शैख़-साहिब का गुज़र कैसे हुआ
