शब्दार्थ
शिकार-फ़रेबी
shikār-farebī
hinoun
अर्थ
शिकार को धोखे या छल से फँसाने की क्रिया।
विस्तार
इसका अर्थ शिकार को धोखे, प्रलोभन या फंदे से बाँधने का हुनर है। शेर में यह उस कमसिन शिकारी के घमंड को बयान करता है जो अपनी धोखेबाज़ी की महारत के कारण उड़ते परिंदों को भी अपना असीर समझता है। शायरी में यह अक्सर महबूब के दिल को रिझाने और क़ैद करने के अंदाज़ का रूपक होता है।
व्युत्पत्ति
Persian compound formed from 'shikār' (hunt/prey) and 'fareb' (trickery/fraud), with the abstract noun suffix '-ī'.
प्रयोग
In classical ghazal tradition, this compound metaphorically illustrates the beloved's alluring charms that ensnare the lover's heart like an unsuspecting bird.
उदाहरण
सय्याद की शिकार-फ़रेबी से कोई ताइर बच न सका।
दाम-ए-उल्फ़त में उसकी शिकार-फ़रेबी का ही जादू चला।
समानार्थी
दाम-फ़रेबीमक्र-ओ-फ़रेबछल-कपट
संबंधित शब्द
शिकारफ़रेबसय्याददाम
