शब्दार्थ

शि'आर

shi'ār

hinoun

अर्थ

आदत, तरीक़ा, चलन, दस्तूर या पहचान।

विस्तार

उर्दू शायरी में 'शि'आर' का आशय किसी की आदत, स्वभाव, चलन या विशेष तौर-तरीक़े से होता है। इस शे'र में यह 'शेवा' और 'फ़न' के साथ मिलकर यह प्रकट करता है कि इच्छा और तमन्ना ही आशिक़ का स्वभाव और कलात्मक तरीक़ा बन चुकी है। यह किसी व्यक्तित्व या कला की स्थायी पहचान को दर्शाता है।

व्युत्पत्ति

Arabic (شِعَار / shi‘ār), from the triconsonantal root š-ʿ-r denoting perception, distinction, or making a sign.

प्रयोग

In ghazal poetry, it frequently combines with words like 'vafa' (faithfulness) or 'shewa' (custom) to define the idealized code of conduct of the true lover.

उदाहरण

वफ़ा करना हमारा शि'आर रहा है।

रंज उठाना ही आशिक़ का शि'आर ठहरा।

समानार्थी

शेवादस्तूरतरीक़ाचलन

संबंधित शब्द

शु'ऊरशा'इरआदत
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